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Thursday, July 26, 2018

सुना है आशिकों के आखों में नींद नही होती

सुना है आशिकों के आखों में नींद नही होती,
सुबह हो जाये एक बार इनकी फिर शाम नही होती,

दिन रात करते रहते हैं इबादत यार की,
फिर भी नही मिलती हैं इनको मंज़िल प्यार की,

यही सवाल किया जब आशिक लोगों से, ऐ आशिक तुमको रातों में नींद क्यों नही आती,
क्या मतलब जो सोते हैं सारी रात क्या उनमें मोहब्बत नही होती,

तो जवाब दिया एक आशिक ने:

मोहब्बत नाम है इसका,
ओर रात दिन जगाना काम है इसका,
जो पड़ गया एक बार राहे मोहब्बत मैं,
न प्यार मिला न मंज़िल मिली राहे मोहब्बत में,
लूट गया सब कुछ यारो राहे मोहब्बत में,

अब जब ये सोचता हूँ सब कुछ तो नींद नही आती,
ओर दिल तो सोने को करता है पर ये आंख नही सोती,

सच सुना अकबर तुमने आशिकों के आंखों में नींद नही होती,
सुबह हो जाये एक बार इनकी तो शाम नही होती,

जब हमने पूछा दूसरे आशिक से तुम्हे क्या गम है,
तो वो बोला,,,,,
हम दिल लगा बैठे उस से जिसका नाम शबनम है,

हमने कहा भाई ये कोन सा गम है,
नाम से तो लगता है कोई हसीन सनम है,
तो वो बोला,,,
सूरज निकलता जब पूरब से,
ओर हवा बहती है जब पश्चिम से,
हमने भी प्यार किया था उसी से,
जो कहती थी बहुत प्यार करते है कसम से,

फिर एक दिन चली गयी वो ओर हम रह गए तन्हा,
फंस गए हैं इस दल दल में जाएं तो जायँ कहाँ,

याद आते हैं वो दिन जब वो पायल पहने के छम छम चलती थी,
उड़ती थी उसकी जुल्फें हवाओं में आसमाँ में घटा छा जाती थी,
ओर क्यों छोड़ के चली गयी मुझे वो कोन सा कसूर कोंन सी मेरी गलती थी,
अरे उसको तो ये भी पता था कि मेरे घर की शमा उसके आने से ही जलती थी,

अब जलाता हुन इस शमा को तो रोशनी नही होती,
सच सुना अकबर तुमने आशिकों के आंखों में नींद नही होती,

फिर क्या था जनाब जो सवाल बहुत करता है ना,
अगर उसी से ही कोई सवाल कर ले तो उसकी क्या हालत होती ह ओर वो भी ख़ुदा::::

ख़ुदा ने मुझसे पूछा,
ऐ अकबर तू क्यों रात दिन जागता है,
क्या तू भी किसी से मोहब्बत करता है,

क्या नाम है उसका तू उसका नाम बता दे,
नाम न सही उसका काम  बता दे,

कोन सा है वो चेहरा जो इन नज़रों से दिखा है,
क्या नाम ह उसका जो तेरे दिल पे लिखा है,

इन तन्हाई भरी रातों में जागता है तुझे कोन सी दिक्कत है,
कोन है वो जिससे तुझे मोहब्बत है,

मैंने कहा बस बहुत हो गया ख़ुदा इतने सवाल क्यों करता है,
खुद ही बनाई तूने ये दुनिया और ये मोहब्बत ओर सवाल हमसे करता है,

अरे हमने सुना है तू तो सुन लेता है चींटी की भी चलने की आवाज़,
फिर क्यों पूछता हमसे न सोने का राज़,

अब जब तू पूछता है हमसे न सोने का राज़,
तो इस दिल से हर घड़ी निकलती है एक ही अवाज़,

की ये दिल भी सोता, ये आंख भी सोती,
काश मुझसे भी किसी को मोहब्बत होती...

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