Sunday, November 11, 2018

मेरे साले

मेरी शादी में मेहमान मुझे अजब निराले मिले।
दहेज में एक बीवी ओर दो साले मिले।।

ओर मेरी सासु मां ने जो दिए थे चाँदी के सिक्के।
खोल के जो देखा तो वो भी काले मिले।।

Thursday, November 8, 2018

तारीफ़ हमारी सुनकर वो

तारीफ़ हमारी सुनकर वो आईने में देखने पहुंच गए खुद को,
आइना किसने दिखाया ये तो बताया ही नही,

ओर एक पागल पीछा करता रहता उनका, ये सबको बता दिया,
उसे पागल किसने बनाया ये तो बताया ही नही।।

पहली जीत पर इतना इतराओ मत,
तुम्हे कितनी बार हराया ये तो बताया ही नही।।


Saturday, September 1, 2018

जब वो बदल गयी

जब वो बदल गयी तो हम भी बदल गए।
अच्छा हुआ जो जल्दी संभाल गए।।

मोहब्त करके हमें क्या हुआ है हासिल।
यूँ समझ लो जो हमसे पीछे थे वो आगे निकल गए।।

ओर उस दिन में सब कुछ हारने ही वाला था।
अच्छा हुआ जो हैम अपनी चाल बदल गए।।

ओर उसकी तपिस क्या थी दोस्तो।
अपने तो सारे अरमान ही जल गए।।

अकबर

Friday, August 31, 2018

ढाई अक्षर प्रेम के

ढाई अक्षर प्रेम के अब मैं सीख गया,
स्कूल तो कभी गया ही नही,
पर प्यार को पढ़ना सीख गया,

मुझे क्या जरूरत थी किसी से लड़ने की,
बस तेरे ही लिए दुनिया से लड़ना सिख गया।।

इसमें कसूर मेरा नही तेरा भी है,
तूने मुझसे ही नज़र क्यों मिलाई जो में आशिक़ी सिख गया।
ओर नजर मिलाते हुए जब पास जाता हूं उसके,
तो कहे वो तू तो बुरी बात सिख गया।।

यूँ नखरे किस बात पर दिखा रही है मिझे,
मेरा नाम अकबर है क्या पता नही तुझे,

अरे पगली बड़े ध्यान से अपनी पलकों को उठा,
में आंखों से काज़ल चुराना भी सीख गया,,
तुझे क्या जरूरत थी आज फिर सावन गाने की
देख आज फिर से भीग गया

अकबर

Friday, August 24, 2018

किसी को नफरत से देखो

किसी को नफरत से देखो तो अज़ाब मिलता है,
ओर किसी को प्यार से देखो तो सवाब मिलता है,

ओर मैने तो उसे आज तक जी भर के देखा ही नही,
जब भी देखो चेहरे पर नक़ाब मिलता है,

अकबर

सुनाते हैं आज वो दास्ताँ

सुनाते हैं आज वो दास्ताँ जो आज तक किसी ने सुनाई नही है,
मोहब्बत तो सबने की है, पर वजह किसी ने बताई नही है,

क्यों पागल हुई जा रही है दुनिया इसके पीछे,
पता सबको है इस मर्ज की दवा किसी ने बनाई नही है,

जो पागल हुआ था इश्क में उसने इतना तो ज़रूर कहा था,
एक बार तो नज़र मिली थी दोबारा आज तक मिलाई नही है,

ओर शाहजहां ने ताजमहल बना कर कोई अहसान नही कर दिया हम पर,
एक ही मुमताज़ जहां में, दूजी आज तक आयी नही है,

मुझे आज भी याद हैं उसकी वो नीली आंखें,
दूजी आज तक इन आँखों में समाइ नही है,

अब जब मुसाफा करता हूँ किसी से तब अहसास होता है,
उस जैसी नरम कलाई खुदा ने किसी बनाई नही है,

अब जो आज हिदायत देते हैं हमें शरीफ बनने की,
कल तक इनमें से एक भी ऐसा न था जिसने मुझे पिलाई नही है,

खाक मज़ा आता है मोहब्बत में, सब कुछ तो लूट गया,
फिर न कहना वजह हमने बताई नही है

मोहब्बत सिर्फ घाटे का सौदा है, इसमें कोई कमाई नही है

अकबर

Thursday, August 16, 2018

अब तो मुझे भी रातों में सपने नज़र आने लगे

अब तो मुझे भी रातों में सपने नज़र आने लगे,
लोग तो रातों में तारों को देखते हैं,,
मुझे तो दिन में ही नज़र आने लगे,,

ओर तू सच में यहाँ है कि नहीं मुझे नही पता,
जहां भी जाती हैं ये नजरें तू वहां नज़र आने लगे,,

ओर इससे ज़्यादा ओर क्या तारीफ़ करूँ तेरी,
तू अपनी ज़ुल्फ़ भी लहरा दे तो समन्दर लहराने लगे,,

ओर बेवकूफ होते हैं वो लोग जो मोहब्बत में दुश्मनी करते हैं,
अरे एक जगह मोहब्बत न मिली तो क्या हुआ,
दूसरी को प्यार से देखो तो उसमें भी लैला नज़र आने लगे।।।

अकबर

मेरे साले

मेरी शादी में मेहमान मुझे अजब निराले मिले। दहेज में एक बीवी ओर दो साले मिले।। ओर मेरी सासु मां ने जो दिए थे चाँदी के सिक्के। खोल के जो दे...