तुझे नही पता तड़पता तो मैं आज भी हुँ,
जिस दिन तुझे न देखूं, तो मचलता तो मैं आज भी हूँ,
क्या समझाऊं ओर कैसे समझाऊ, कि जिन्दा हूँ,
पर तुझ पर मरता तो मैं आज भी हूँ,
ओर तझे याद है कहाँ मिले थे हम,
उसी गली से गुजरता तो मैं आज भी हूँ,
तू ना समझेगी ओर न समझ पाएगी,
एक राज था मैं, और एक राज ही हूँ,,,,,
अकबर
Very nice
ReplyDeletekyu tarp rahe ho mere bhai
ReplyDelete