Friday, June 1, 2018

तड़पता तो आज भी हूँ

तुझे नही पता तड़पता तो मैं आज भी हुँ,
जिस दिन तुझे न देखूं, तो मचलता तो मैं आज भी हूँ,

क्या समझाऊं ओर कैसे समझाऊ, कि जिन्दा हूँ,
पर तुझ पर मरता तो मैं आज भी हूँ,


ओर तझे याद है कहाँ मिले थे हम,
उसी गली से गुजरता तो मैं आज भी हूँ,

तू ना समझेगी ओर न समझ पाएगी,
एक राज था  मैं, और एक राज ही हूँ,,,,,

अकबर

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Thanks

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