बेखुदी की जिंदगी अब बहुत जी ली हमने अब थोड़ी आशिक़ी भी कर लें,
दिल की बात भी बहुत हो गयी अब थोड़ी दिल्लगी भी कर लें,
बच के कहाँ जाओगी मेरी नजरों से,
मिलोगी जहाँ वही बाहों में भर लें
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मेरे साले
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