मेरी शादी में मेहमान मुझे अजब निराले मिले।
दहेज में एक बीवी ओर दो साले मिले।।
ओर मेरी सासु मां ने जो दिए थे चाँदी के सिक्के।
खोल के जो देखा तो वो भी काले मिले।।
मेरी शादी में मेहमान मुझे अजब निराले मिले।
दहेज में एक बीवी ओर दो साले मिले।।
ओर मेरी सासु मां ने जो दिए थे चाँदी के सिक्के।
खोल के जो देखा तो वो भी काले मिले।।
जब वो बदल गयी तो हम भी बदल गए।
अच्छा हुआ जो जल्दी संभाल गए।।
मोहब्त करके हमें क्या हुआ है हासिल।
यूँ समझ लो जो हमसे पीछे थे वो आगे निकल गए।।
ओर उस दिन में सब कुछ हारने ही वाला था।
अच्छा हुआ जो हैम अपनी चाल बदल गए।।
ओर उसकी तपिस क्या थी दोस्तो।
अपने तो सारे अरमान ही जल गए।।
अकबर
ढाई अक्षर प्रेम के अब मैं सीख गया,
स्कूल तो कभी गया ही नही,
पर प्यार को पढ़ना सीख गया,
मुझे क्या जरूरत थी किसी से लड़ने की,
बस तेरे ही लिए दुनिया से लड़ना सिख गया।।
इसमें कसूर मेरा नही तेरा भी है,
तूने मुझसे ही नज़र क्यों मिलाई जो में आशिक़ी सिख गया।
ओर नजर मिलाते हुए जब पास जाता हूं उसके,
तो कहे वो तू तो बुरी बात सिख गया।।
यूँ नखरे किस बात पर दिखा रही है मिझे,
मेरा नाम अकबर है क्या पता नही तुझे,
अरे पगली बड़े ध्यान से अपनी पलकों को उठा,
में आंखों से काज़ल चुराना भी सीख गया,,
तुझे क्या जरूरत थी आज फिर सावन गाने की
देख आज फिर से भीग गया
अकबर
किसी को नफरत से देखो तो अज़ाब मिलता है,
ओर किसी को प्यार से देखो तो सवाब मिलता है,
ओर मैने तो उसे आज तक जी भर के देखा ही नही,
जब भी देखो चेहरे पर नक़ाब मिलता है,
अकबर
सुनाते हैं आज वो दास्ताँ जो आज तक किसी ने सुनाई नही है,
मोहब्बत तो सबने की है, पर वजह किसी ने बताई नही है,
क्यों पागल हुई जा रही है दुनिया इसके पीछे,
पता सबको है इस मर्ज की दवा किसी ने बनाई नही है,
जो पागल हुआ था इश्क में उसने इतना तो ज़रूर कहा था,
एक बार तो नज़र मिली थी दोबारा आज तक मिलाई नही है,
ओर शाहजहां ने ताजमहल बना कर कोई अहसान नही कर दिया हम पर,
एक ही मुमताज़ जहां में, दूजी आज तक आयी नही है,
मुझे आज भी याद हैं उसकी वो नीली आंखें,
दूजी आज तक इन आँखों में समाइ नही है,
अब जब मुसाफा करता हूँ किसी से तब अहसास होता है,
उस जैसी नरम कलाई खुदा ने किसी बनाई नही है,
अब जो आज हिदायत देते हैं हमें शरीफ बनने की,
कल तक इनमें से एक भी ऐसा न था जिसने मुझे पिलाई नही है,
खाक मज़ा आता है मोहब्बत में, सब कुछ तो लूट गया,
फिर न कहना वजह हमने बताई नही है
मोहब्बत सिर्फ घाटे का सौदा है, इसमें कोई कमाई नही है
अकबर
अब तो मुझे भी रातों में सपने नज़र आने लगे,
लोग तो रातों में तारों को देखते हैं,,
मुझे तो दिन में ही नज़र आने लगे,,
ओर तू सच में यहाँ है कि नहीं मुझे नही पता,
जहां भी जाती हैं ये नजरें तू वहां नज़र आने लगे,,
ओर इससे ज़्यादा ओर क्या तारीफ़ करूँ तेरी,
तू अपनी ज़ुल्फ़ भी लहरा दे तो समन्दर लहराने लगे,,
ओर बेवकूफ होते हैं वो लोग जो मोहब्बत में दुश्मनी करते हैं,
अरे एक जगह मोहब्बत न मिली तो क्या हुआ,
दूसरी को प्यार से देखो तो उसमें भी लैला नज़र आने लगे।।।
अकबर
तू कितनी खूबसूरत है तुझे नही पता,
लगता है जैसे कोई फूल अभी अभी खिला,
तेरे ही जैसे फूल की जरूरत थी हमको,
शुक्र है खुदा जो आज तू मिला,,
तेरी खुसबू तो खिलने से ही पहले आने लगी,
जैसे सांस जाने के बाद आने लगी,
ऐ फूल तू ऐसे ही महकते रहना,
नही आने वाली सांस भी चली जायेगी वरना,
फिर क्या पता ओर कोई ऐसा फूल चमन में न खिला,
तू कितनी खूबसूरत है तुझे नहीं पता,
लगता है जैसे कोई फूल अभी अभी खिला,,
में गर फूल हु तो तू भंवरा है मेरा,
तेरे आने से खिलता है चेहरा मेरा,
तू रोज आते रहना में रोज खिलती रहूंगी,
तू रोज खुसबू लेना में रोज महकती रहूंगी,,
तेरे जैसा कोई भंवरा भी आज तक मुझे न मिला,
तू कितना खूबसूरत है तुझे नही पता,,
अकबर
सच बोलने वालो अब झूठ बोलना सीख लो,
ओर मेहनत से काम करने वालो तुम भी आराम करना सीख लो,
मंज़िल का क्या वो तो मिल ही जाएगी,
कुछ मत करो बस चमचागिरी सीख लो,
इसे सीखना तो कहीं मत जाओ,
बस अपने ही आस पास देख लो,
एक न एक चमचागिरी करते मिल ही जाएगा,
बस उसी से सीख लो,
जो काम कम और जी हुजूरी ज्यादा करे,
मेहनत न करे फिर भी मेहनत का वादा करे,
बस वही सबसे बड़ा चमचा है,
जो बरसे कम, ओर गरजा ज्यादा करे,
अब तो पता चल ही गया होगा,
की चमचा कैसा होता है,
ये कोई फरिस्ता नही बस इंसान जैसा होता है,
शेर की तरह जीना है, तो खुद्दार बनना सीख लो,
ओर दुनिया सलाम करेगी, चमचागिरी छोड़ो, खुद राह बनाना सीख लो....
अकबर
सुना है आशिकों के आखों में नींद नही होती,
सुबह हो जाये एक बार इनकी फिर शाम नही होती,
दिन रात करते रहते हैं इबादत यार की,
फिर भी नही मिलती हैं इनको मंज़िल प्यार की,
यही सवाल किया जब आशिक लोगों से, ऐ आशिक तुमको रातों में नींद क्यों नही आती,
क्या मतलब जो सोते हैं सारी रात क्या उनमें मोहब्बत नही होती,
तो जवाब दिया एक आशिक ने:
मोहब्बत नाम है इसका,
ओर रात दिन जगाना काम है इसका,
जो पड़ गया एक बार राहे मोहब्बत मैं,
न प्यार मिला न मंज़िल मिली राहे मोहब्बत में,
लूट गया सब कुछ यारो राहे मोहब्बत में,
अब जब ये सोचता हूँ सब कुछ तो नींद नही आती,
ओर दिल तो सोने को करता है पर ये आंख नही सोती,
सच सुना अकबर तुमने आशिकों के आंखों में नींद नही होती,
सुबह हो जाये एक बार इनकी तो शाम नही होती,
जब हमने पूछा दूसरे आशिक से तुम्हे क्या गम है,
तो वो बोला,,,,,
हम दिल लगा बैठे उस से जिसका नाम शबनम है,
हमने कहा भाई ये कोन सा गम है,
नाम से तो लगता है कोई हसीन सनम है,
तो वो बोला,,,
सूरज निकलता जब पूरब से,
ओर हवा बहती है जब पश्चिम से,
हमने भी प्यार किया था उसी से,
जो कहती थी बहुत प्यार करते है कसम से,
फिर एक दिन चली गयी वो ओर हम रह गए तन्हा,
फंस गए हैं इस दल दल में जाएं तो जायँ कहाँ,
याद आते हैं वो दिन जब वो पायल पहने के छम छम चलती थी,
उड़ती थी उसकी जुल्फें हवाओं में आसमाँ में घटा छा जाती थी,
ओर क्यों छोड़ के चली गयी मुझे वो कोन सा कसूर कोंन सी मेरी गलती थी,
अरे उसको तो ये भी पता था कि मेरे घर की शमा उसके आने से ही जलती थी,
अब जलाता हुन इस शमा को तो रोशनी नही होती,
सच सुना अकबर तुमने आशिकों के आंखों में नींद नही होती,
फिर क्या था जनाब जो सवाल बहुत करता है ना,
अगर उसी से ही कोई सवाल कर ले तो उसकी क्या हालत होती ह ओर वो भी ख़ुदा::::
ख़ुदा ने मुझसे पूछा,
ऐ अकबर तू क्यों रात दिन जागता है,
क्या तू भी किसी से मोहब्बत करता है,
क्या नाम है उसका तू उसका नाम बता दे,
नाम न सही उसका काम बता दे,
कोन सा है वो चेहरा जो इन नज़रों से दिखा है,
क्या नाम ह उसका जो तेरे दिल पे लिखा है,
इन तन्हाई भरी रातों में जागता है तुझे कोन सी दिक्कत है,
कोन है वो जिससे तुझे मोहब्बत है,
मैंने कहा बस बहुत हो गया ख़ुदा इतने सवाल क्यों करता है,
खुद ही बनाई तूने ये दुनिया और ये मोहब्बत ओर सवाल हमसे करता है,
अरे हमने सुना है तू तो सुन लेता है चींटी की भी चलने की आवाज़,
फिर क्यों पूछता हमसे न सोने का राज़,
अब जब तू पूछता है हमसे न सोने का राज़,
तो इस दिल से हर घड़ी निकलती है एक ही अवाज़,
की ये दिल भी सोता, ये आंख भी सोती,
काश मुझसे भी किसी को मोहब्बत होती...
नज़र मिले न मिले दिल तो हमने पहले ही मिला रखे हैं,
कैसे न नज़र पड़े तुम पर हमारी गजरे में फूल तो आपने ही खिला रखे हैं,
ओर ये कैसे कहा आपने कि आपको पाना है मुश्किल,
गजरे में फूल आपने खिला रखे हैं, तो भवरे हमने भी पाल रखे हैं.
अकबर
बेखुदी की जिंदगी अब बहुत जी ली हमने अब थोड़ी आशिक़ी भी कर लें,
दिल की बात भी बहुत हो गयी अब थोड़ी दिल्लगी भी कर लें,
बच के कहाँ जाओगी मेरी नजरों से,
मिलोगी जहाँ वही बाहों में भर लें
ऐ मेरे यार तुझ पर न जाने कितनों की नज़र है,
ओर उन नज़रों में एक मेरी भी नज़र है,
तझे नही पता किस नज़र में असर है,
असर है जिस नजर में वो मेरी नजर है
तेरे गाल पर जो एक तिल है,
इसी ने तो लूटा मेरा दिल है,
ओ बेखबर एक नज़र इधर भी देख ले,
मेरे दिल में भी तेरे लिए घर है,,
ये इशके नज़र है,
ये इश्के नज़र है
तू दिल की हर धड़कन है मेरे लिए,
तू न मिली तो जियूँगा किसके लिए,
मांग लूंगा तुझे रब से में चाहे मिले पल भर के लिये,
दिखा दूंगा तुझको भी में, मेरी मोहब्बत में कितना असर है,
ये इश्के नज़र है, ये इश्के नज़र है,
अकबर
मेरी शादी में मेहमान मुझे अजब निराले मिले। दहेज में एक बीवी ओर दो साले मिले।। ओर मेरी सासु मां ने जो दिए थे चाँदी के सिक्के। खोल के जो दे...