Thursday, August 16, 2018

अब तो मुझे भी रातों में सपने नज़र आने लगे

अब तो मुझे भी रातों में सपने नज़र आने लगे,
लोग तो रातों में तारों को देखते हैं,,
मुझे तो दिन में ही नज़र आने लगे,,

ओर तू सच में यहाँ है कि नहीं मुझे नही पता,
जहां भी जाती हैं ये नजरें तू वहां नज़र आने लगे,,

ओर इससे ज़्यादा ओर क्या तारीफ़ करूँ तेरी,
तू अपनी ज़ुल्फ़ भी लहरा दे तो समन्दर लहराने लगे,,

ओर बेवकूफ होते हैं वो लोग जो मोहब्बत में दुश्मनी करते हैं,
अरे एक जगह मोहब्बत न मिली तो क्या हुआ,
दूसरी को प्यार से देखो तो उसमें भी लैला नज़र आने लगे।।।

अकबर

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